संवाददाता:शमशुल कुरैशी/www.news1uttrakhand.in
मंगलौर। उत्तराखंड मंगलौर नारसन बॉर्डर पर ग्रीन सेस की तैयारी पूरी कर ली गई है। उत्तराखंड की आबोहवा को प्रदूषण मुक्त रखने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में धामी सरकार का एक बड़ा फैसला अब धरातल पर उतरने को तैयार है। बाहरी राज्यों से उत्तराखंड आने वाले वाहनों को अब ‘ग्रीन सेस’ (हरित शुल्क) चुकाना होगा। दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे पर स्थित उत्तराखंड के प्रवेश द्वार नारसन बॉर्डर पर इसके लिए परिवहन विभाग ने अपनी पूरी तैयारी कर ली है। विभाग ने यहाँ हाई-टेक इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित किया है,ताकि यात्रियों को असुविधा न हो और राजस्व का संग्रह भी सुचारू रूप से हो सके। इस क्रम में उत्तराखंड परिवहन विभाग आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से वसूली का ए सकेगा।
आप को बता दे कि
नारसन बॉर्डर पर वाहनों की भारी आवाजाही को देखते हुए परिवहन विभाग ने इसे पूरी तरह डिजिटल बनाने पर जोर दिया है। इसलिए इसके लिए
RFID और कैमरों का जाल बिछाया जा रहा है। अब उत्तराखंड बॉर्डर पर अत्याधुनिक RFID (Radio Frequency Identification) रीडर और हाई-डेफिनिशन कैमरे इंस्टॉल किए जा चुके हैं। अब बाहर से आने वाली गाड़ियां लंबी कतारो में नहीं लगेगी,इधर विभाग का दावा है कि फास्टैग (FASTag) और अन्य डिजिटल माध्यमों से शुल्क कटेगा, जिससे बॉर्डर पर जाम की स्थिति पैदा नहीं होगी।
* सॉफ्टवेयर टेस्टिंग: पिछले कुछ दिनों से सॉफ्टवेयर के रिस्पॉन्स टाइम और डेटा सिंक की गहन टेस्टिंग की जा रही है ताकि लॉन्च के बाद कोई तकनीकी खामी न आए।
उत्तराखंड सरकार का उद्देश्य इस सेस के जरिए मिलने वाली राशि को पर्यावरण संरक्षण और प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में खर्च करना है। नारसन चेकपोस्ट पर कार, ट्रक, डंपर और अन्य व्यवसायिक वाहनों की कैटेगरी के हिसाब से शुल्क निर्धारित किया गया है। परिवहन विभाग की विशेष टीम फिलहाल सिस्टम की मॉनिटरिंग कर रही है ताकि भुगतान की प्रक्रिया ‘कैशलेस’ और पारदर्शी बनी रहे।
कृष्ण चंद्र टलरिया, एआरटीओ रुड़की “हमने नारसन बॉर्डर पर ग्रीन सेस वसूली के लिए सभी तकनीकी इंतजाम पूरे कर लिए हैं। RFID कैमरों का सेटअप लग चुका है और सॉफ्टवेयर का ट्रायल रन चल रहा है। हमारा पूरा फोकस इस बात पर है कि यात्रियों को कम से कम समय लगे और फास्टैग के जरिए प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो जाए।”
निष्कर्ष: ग्रीन सेस लागू होने के बाद उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले बाहरी नंबरों के वाहनों को अपनी श्रेणी के अनुसार तय राशि देनी होगी। इससे जहाँ एक ओर सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को भी बल मिलेगा।






