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सावधान:उत्तराखंड में ‘ऑपरेशन क्लीन’: डीजीपी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में महा-सत्यापन अभियान शुरू, संदिग्धों और घुसपैठियों पर होगी महा स्ट्राइक।

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ब्यूरो/देहरादून:www.news1uttrakhand.in

देहरादून: उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और देवभूमि की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए पुलिस महानिदेशक डीजीपी दीपम सेठ ने एक बड़े अभियान का शंखनाद किया है। पूरे प्रदेश में अब व्यापक सत्यापन अभियान  चलाया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों, घुसपैठियों और संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान कर उन पर कठोर कानूनी कार्यवाही करना है। इस अभियान में ज्यादातर संदिग्ध वह बाहरी’ और घुसपैठिए लोग रडार पर रहेंगे। डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी जनपदों में सर्किल, थाना और चौकी स्तर पर सघन चेकिंग की जाए। अभियान के केंद्र में मुख्य रूप से अवैध प्रवासी: बांग्लादेशी और वीज़ा अवधि खत्म होने के बाद भी टिके विदेशी नागरिक होंगे।

संदिग्ध बाहरी व्यक्ति: जो बिना किसी वैध पहचान या सत्यापन के रिहायशी इलाकों में रह रहे हैं।

◼️ इन क्षेत्रों और सेवाओं पर रहेगा विशेष फोकस

पुलिस की संयुक्त टीमें (एसटीएफ, एसओजी, एलआईयू और स्थानीय पुलिस अब केवल चौराहों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के अंदर तक जांच करेंगी। इस दौरानआवासीय एवं व्यावसायिक परिसर मल्टी स्टोरी अपार्टमेंट, पीजी, होम-स्टे, आश्रम, धर्मशाला और होटल को अभियान के तहत जांचा जाएगा।

डिलीवरी सेवाएं: Amazon, Zomato, Blinkit जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के एजेंट।

इंडस्ट्रियल एरिया: यहाँ काम करने वाले ठेका मजदूर और कर्मचारी।

निजी संस्थान: जिम, स्पा सेंटर, कोचिंग इंस्टिट्यूट, ब्यूटी पार्लर और सैलून।

◼️ मकान मालिकों और प्रॉपर्टी डीलरों की बढ़ेगी मुश्किलें

बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किरायेदार रखने वालों पर अब गाज गिरनी तय है। डीजीपी ने निर्देश दिए हैं कि प्रॉपर्टी डीलर और रियल एस्टेट एजेंटों की भी जांच होगी।

बिना सत्यापन किरायेदारी कराने या संदिग्धों को आश्रय देने पर कठोर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

घरेलू सहायकों, ड्राइवर और केयर-टेकर का अनिवार्य सत्यापन करना होगा।

“उत्तराखंड पुलिस का यह अभियान महिलाओं, बुजुर्गों और स्थानीय नागरिकों को भयमुक्त वातावरण देने के लिए है। हर स्तर पर जवाबदेही तय की गई है और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी नजर रहेगी।”

— श्री दीपम सेठ, DGP उत्तराखंड

◼️ हाई-टेक होगा वेरिफिकेशन

इस बार पुलिस केवल कागजों पर निर्भर नहीं है। संदिग्धों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीकी और केंद्रीय डेटाबेस का सहारा लिया जा रहा है:

NATGRID, CCTNS और ICJS जैसे पोर्टलों से डेटा का मिलान किया जाएगा।

मॉल, स्कूलों और संस्थानों में High Resolution CCTV कैमरों की स्थिति जांची जाएगी।

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