संवाददाता: शमशुल कुरैशी/न्यूज 1उत्तराखण्ड
मंगलौर। उत्तराखंड पुलिस के “मित्र पुलिस” के ध्येय को सार्थक करते हुए कोतवाली मंगलौर पुलिस ने एक व्यक्ति की खोई हुई जमापूंजी वापस दिलाकर सराहनीय कार्य किया है। साइबर ठगों का शिकार हुए एक फैक्ट्री कर्मी को पुलिस की तत्परता के कारण पीड़ित पूरे ₹50,000 वापस मिल गए हैं।
जानकारी के अनुसार सहारनपुर निवासी पंकज कुमार पुत्र मेघराज, जो मंगलौर कोतवाली क्षेत्र की एक फैक्ट्री में कार्यरत हैं, जनवरी माह में साइबर ठगी का शिकार हो गए थे। पिछले माह जनवरी को उनके साथ पीएफ,चालान प्रेषित करने के नाम पर ₹50,000 की ऑनलाइन धोखाधड़ी की गई थी। ठगी का अहसास होते ही पीड़ित ने तुरंत कोतवाली मंगलौर पुलिस को इसकी सूचना दी।
सूचना मिलते ही मंगलौर कोतवाली पुलिस एक्शन मोड में आ गई। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अमरजीत सिंह के आदेश पर कार्यालय में नियुक्त कास्टेबल जफर हुसैन ने बिना समय गंवाए कुशल तकनीकी सहायता ली और संबंधित एजेंसी से पत्राचार कर ठगों के खाते को तत्काल फ्रीज करवा दिया।
लगातार फॉलोअप और तकनीकी जांच के परिणामस्वरूप, 24 फरवरी को पंकज कुमार के पूरे ₹50,000 उनके खाते में वापस लौटा दिए गए। अपनी मेहनत की कमाई वापस पाकर पंकज कुमार के चेहरे पर खुशी साफ देखी जा सकती थी, उन्होंने मंगलौर पुलिस और उत्तराखंड पुलिस का तहे दिल से आभार व्यक्त किया।
कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह ने साइबर ठगों से सावधान रहने तथा सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि इस सफलता के साथ पुलिस ने आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी भी जारी की है। अज्ञात लिंक किसी भी अनजान या लुभावने लिंक पर क्लिक न करें।
प्रलोभन,ऑनलाइन लॉटरी या भारी मुनाफे के झांसे में न आएं। अनजान कॉल्स पर अपनी निजी जानकारी या ओटीपी साझा न करें। उन्होंने बताया कि साइबर ठगी होने पर पुलिस को तत्काल सूचना। यदि आप साइबर ठगी का शिकार होते हैं, तो बिना देर किए गोल्डन ऑवर में हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें।





