संवाददाता:शमशुल कुरैशी/www.news1uttrakhand.in
मंगलौर (उत्तराखंड): उत्तराखंड के मंगलौर कस्बे से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने रिश्तों की मर्यादा और इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ एक दिव्यांग (मूक-बधिर) महिला को उसके ही ससुराल वालों ने चलती कार से बीच सड़क पर धक्का दे दिया और उसे तड़पता हुआ छोड़कर मौके से फरार हो गए। राहगीरों ने जब महिला को सड़क पर बेतहाशा गिरते देखा, तो हड़कंप मच गया। जब तक लोग कुछ समझ पाते और कार को रोकते, आरोपी तेजी से वाहन लेकर वहां से रफूचक्कर हो गए।
मायके छोड़ने के बहाने रची साजिश
जानकारी के मुताबिक, ससुराल पक्ष के लोग विवाहिता को उसके मायके मिलाने के बहाने घर से लेकर निकले थे। बताया जा रहा है कि ससुराल वाले उसे मायके में ही छोड़ना चाहते थे, लेकिन विवाहिता अपने बच्चों के बिना रहने को तैयार नहीं थी। ममता का मोह और बच्चों की याद में जब वह रुकने को राजी नहीं हुई, तो ससुराल पक्ष ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं।
दुधमुंहे बच्चे से किया अलग
मंगलौर से वापस लौटते समय रास्ते में पंजाब नेशनल बैंक के समीप ससुराल वालों ने सोची-समझी साजिश के तहत दिव्यांग (मूक-बधिर) महिला को चलती कार से बाहर फेंक दिया। इस घटना की सबसे दर्दनाक कड़ी यह है कि पीड़ित विवाहिता का मात्र दो माह का दुधमुंहा बच्चा है, जिसे ससुराल वालों ने उसकी गोद से छीन लिया और असहाय हालत में माँ को सड़क पर छोड़ दिया।
“एक माँ जो बोल नहीं सकती, सुन नहीं सकती, उसने इशारों में अपना दर्द बयां करने की कोशिश की, लेकिन पत्थर दिल ससुराल वालों को उस मासूम बच्चे पर भी तरस नहीं आया।”
पुलिस की शरण में पीड़ित परिवार
सड़क पर लावारिस और घायल अवस्था में मिली महिला के परिजनों को जब इसकी सूचना मिली, तो कोहराम मच गया। मायके पक्ष के लोगों ने तुरंत मंगलौर पुलिस को मामले की तहरीर दी है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ बच्चे को वापस दिलाने की गुहार लगाई है।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि दिव्यांग महिला के साथ इस तरह का व्यवहार अक्षम्य है और दोषियों को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।






