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कोटद्वार जा रहे मुस्लिम सेवा संगठन के प्रतिनिधि मंडल को पुलिस ने रोका; नईम और आकिब कुरैशी गिरफ्तार। मोहम्मद दीपक उर्फ दीपक कुमार से जा रहे थे, मुलाक़ात के लिए।

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देहरादून:ब्यूरो/news1uttrakhand.in

कोटद्वार/उत्तराखंड | शुक्रवार को कोटद्वार में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब ‘मुस्लिम सेवा संगठन’ के एक प्रतिनिधि मंडल को पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया। यह प्रतिनिधि मंडल मुहम्मद दीपक से मुलाकात करने के लिए कोटद्वार की ओर रवाना हुआ था। इस दौरान पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए संगठन के अध्यक्ष नईम कुरैशी और उपाध्यक्ष आकिब कुरैशी को हिरासत में ले लिया, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गिरफ्तारी के बाद नईम कुरैशी के तीखे सवाल

अपनी गिरफ्तारी के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए नईम कुरैशी ने प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा:

“देश में दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है? एक तरफ कुछ खास संगठनों और दलों को पुलिस सुरक्षा के बीच अपनी गतिविधियाँ चलाने की पूरी छूट दी जाती है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक सौहार्द और समर्थन की बात करने वाले प्रतिनिधियों को अपराधियों की तरह रोका जा रहा है। क्या कानून सबके लिए बराबर नहीं है, या फिर यह बराबरी केवल सत्ता के करीबियों और ताक़तवरों तक सीमित रह गई है?”

लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार: आकिब कुरैशी

संगठन के उपाध्यक्ष आकिब कुरैशी ने पुलिसिया कार्रवाई को असंवैधानिक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन का पैमाना अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग है। आकिब ने सवाल उठाया कि:

दोहरा रवैया: प्रशासन किसके प्रति नरम और किसके प्रति सख्त है, यह अब साफ हो चुका है।

आवाज दबाने की कोशिश: जब संरक्षण केवल सत्ता पक्ष के करीबियों को मिलता है, तो जनता की आवाज उठाने वालों को जेल क्यों भेजा जाता है?

अधिकारों का हनन: यह कार्रवाई सीधे तौर पर हमारे लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों पर चोट है।

क्षेत्र में बढ़ा तनाव

प्रतिनिधि मंडल को रोकने और प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही संगठन के कार्यकर्ताओं में भारी रोष देखा जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि यह दौरा पूरी तरह शांतिपूर्ण और सामाजिक सद्भाव के उद्देश्य से था, लेकिन पुलिस ने इसे बलपूर्वक रोककर स्थिति को और पेचीदा बना दिया है।

फिलहाल, पुलिस प्रशासन ने इस मामले में सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है, लेकिन “दोहरे कानून” के आरोपों ने सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक एक नई बहस छेड़ दी है।

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