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मंगलौर में बेखौफ मिलावटखोर: हरिद्वार-रुड़की में ताबड़तोड़ छापेमारी, तो फिर मंगलौर पर मेहरबान क्यों है खाद्य सुरक्षा विभाग?

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संवाददाता:हरिद्वार/news1uttrakhand.in 

विशेष रिपोर्ट मंगलौर! उत्तराखंड के हरिद्वार और रुड़की क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें आए दिन मिठाई की दुकानों, दूध की डेयरियों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर सैंपल भरती नजर आती हैं। लेकिन ठीक इसके उलट, मंगलौर क्षेत्र में विभाग की यह ‘सक्रियता’ पूरी तरह गायब है। पिछले कई महीनों, बल्कि सालों से मंगलौर में किसी बड़े खाद्य प्रतिष्ठान पर ठोस प्रशासनिक कार्रवाई न होना अब क्षेत्रवासियों के बीच चर्चा और संदेह का विषय बन चुका है। 

स्थानीय निवासियों का कहना है कि मंगलौर और इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में दूध, पनीर, खोया, मिठाइयों और पैकेज्ड फूड की बिक्री बड़े पैमाने पर होती है। त्योहारी सीजन हो या आम दिन, मिलावटखोरी की शिकायतें आम हैं। इसके बावजूद खाद्य सुरक्षा विभाग मंगलौर का रुख करने से बचता दिखता है। 

हरिद्वार-रुड़की में कार्रवाई, मंगलौर में चुप्पी क्यों? जनता का सवाल वाजिब है—अगर हरिद्वार शहर और रुड़की तहसील क्षेत्र में लगातार सैंपल लिए जा रहे हैं और मिलावटखोरों पर कार्रवाई हो रही है, तो मंगलौर में कार्रवाई का स्तर शून्य क्यों है? क्या मंगलौर क्षेत्र में बिकने वाले खाद्य पदार्थ सौ फीसदी शुद्ध हैं, या फिर विभाग की इस खामोशी के पीछे कोई अनदेखा ‘संरक्षण’ काम कर रहा है?

सेहत से खिलवाड़ और उठते सवाल खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कथित अनदेखी का सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। विभागीय ढिलाई के कारण मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं और वे बिना किसी डर के लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।

  • बड़ा सवाल: आखिर कब जगेगा खाद्य सुरक्षा विभाग?
  • जनता की मांग: मंगलौर क्षेत्र की डेयरियों, मिठाई की दुकानों और निर्माण इकाइयों पर तुरंत सघन चेकिंग अभियान चलाकर निष्पक्ष सैंपल भरे जाएं।

अब देखना यह होगा कि इस मामले में उच्च अधिकारी संज्ञान लेते हैं या मंगलौर की जनता यूं ही मिलावटी सामान खाने को मजबूर रहेगी।

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