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संवादाता:शमशुल कुरैशी/news1uttrakhand.in pl

मंगलौर/रुड़की। हरिद्वार जनपद की नवगठित नगर पंचायतों में विकास कार्यों पर ग्रहण लग गया है। सरकार की ओर से पिछले एक साल से विकास बजट जारी न होने के कारण नगर पंचायत अध्यक्षों का धैर्य जवाब दे गया है। शुक्रवार को पाडली गुर्जर में हुई एक आपात बैठक में अध्यक्षों ने दो-टूक कहा कि यदि जल्द बजट नहीं मिला, तो वे सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को सौंप देंगे।

गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने निकाय चुनाव के दौरान कई नई नगर पंचायतों का गठन किया था। इस सरकार ने निकाय चुनाव के दौरान नगर पंचायत चुनाव भी कराए। आपको बताते दें कि नई नगर पंचायत तो बन गई?लेकिन अभी तक सरकार इन नगर पंचायतों के लिए बजट ना ही निर्धारित किया और न जारी किया। सरकार एक तरफ शहरीकरण और विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई ‘नगर पंचायतें’ बिना बजट के पंगु बनी हुई हैं। क्या सरकार जमीनी स्तर पर विकास चाहती है या ये घोषणाएं सिर्फ कागजी हैं? इस सम्बन्ध में ओर बजट की इस लड़ाई को मजबूती से लड़ने के लिए नगर पंचायत अध्यक्षों ने एक संगठन बनाने का निर्णय लिया है। इस दौरान एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर ढंडेरा नगर पंचायत अध्यक्ष सतीश नेगी को इस संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बैठक में पाडली गुर्जर अध्यक्ष तौफीक आलम, रामपुर चेयरमैन प्रवेज सुल्तान और इमलीखेड़ा चेयरमैन प्रतिनिधि नीरज सैनी सहित कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक के दौरान नगर पंचायत की समस्याओं के लेकर भी चर्चा की गई।सबसे बड़ी समस्या जल निकासी और सफाई की बताई गई है।ढंडेरा जैसी बड़ी नगर पंचायतों में जल निकासी और सफाई की व्यवस्था चरमरा गई है। कूड़ा वाहनों और सफाई कर्मचारियों की भारी कमी है, जिससे गलियों में गंदगी का अंबार लगा है।

बजट के अभाव में अधूरे निर्माण सड़कों, नालियों और पार्कों का निर्माण कार्य पूरी तरह रुका पड़ा है। सरकार द्वारा बजट ने मिलने से क्षेत्र की जनता और वार्ड सभासदों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि जनप्रतिनिधि बजट होने के कारण जनता से किए गए वादों को पूरा करने में असमर्थ हैं।

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