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चुनावी रंजिश में ‘रणक्षेत्र’ बना मंगलौर का गाँव, मसीहा बनी पुलिस: तड़पते घायलों को सरकारी गाड़ी में लादकर अस्पताल भागे कोतवाल

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संवाददाता: डॉ.अरशद हुसैन/news1uttrakhand.in

मंगलौर/हरिद्वार। मंगलौर कोतवाली क्षेत्र के घोसीपुरा गांव में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब पुरानी चुनावी रंजिश ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। गाँव की गलियाँ चीख-पुकार से गूँज उठीं और खून से लाल हो गईं। लेकिन इस खौफनाक मंजर के बीच उत्तराखंड पुलिस का एक ऐसा मानवीय चेहरा सामने आया, जिसने न सिर्फ कानून का मान बढ़ाया बल्कि तीन जिंदगियों को मौत के मुँह से बाहर खींच लिया।

 

जानकारी के मुताबिक, घोसीपुरा गांव में दो पक्षों के बीच लंबे समय से चुनावी रंजिश चली आ रही थी। शुक्रवार को यह विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते लाठी-डंडे और धारदार हथियार निकल आए। इस हिंसक झड़प में एक ही पक्ष के तीन लोग गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। इनमें से दो की हालत इतनी नाजुक थी कि उनका शरीर साथ छोड़ रहा था। इस दौरान कोतवाल ने एम्बुलेंस का नहीं किया इंतजार, खुद बने ‘सारथी’ घटना की सूचना मिलते ही मंगलौर कोतवाल अमरजीत सिंह और एसएसआई रफत अली दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। मौके की नजाकत को भांपते हुए पुलिस अधिकारियों ने एम्बुलेंस का इंतजार कर समय बर्बाद करना मुनासिब नहीं समझा।

“वर्दी की संवेदनशीलता देख ग्रामीण भी दंग रह गए। जांबाज अफसरों ने लहूलुहान घायलों को अपने हाथों से उठाकर सरकारी गाड़ी में डाला और तेज रफ्तार के साथ रुड़की सिविल अस्पताल की ओर दौड़ लगा दी। शांति व्यवस्था कायम रखते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। घायलो के अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया है। वहीं, घटना के बाद गाँव में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और शांति व्यवस्था कायम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

‘मित्र पुलिस’ के जज्बे को सलाम

आज पूरे इलाके में मंगलौर पुलिस की इस फुर्ती और संवेदनशीलता की चर्चा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कोतवाल अमरजीत सिंह और उनकी टीम समय पर न पहुँचती, तो आज परिणाम बेहद दुखद हो सकते थे। पुलिस अब आरोपियों की धरपकड़ के लिए दबिश दे रही है।

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