संवाददाता:शमसुल कुरेशी/news1uttrakhand.in
मंगलौर। मतदाता सूची में दर्ज आपत्तियों और पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मंगलौर के बूथ संख्या 1 पर चल रही एसआईआर सत्यापन प्रक्रिया के दौरान एक बड़ा मामला सामने आया है। मौके पर तैनात बीएलओ ने मतदाता सूची से जुड़ी आपत्तियों के सत्यापन और उन पर हस्ताक्षर करने की बात से साफ इंकार कर दिया है।

मिली जानकारी के अनुसार, जब बीएलओ से ‘मंगेराम’ नामक व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों के संबंध में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसे किसी भी आपत्ति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसके अलावा, जांच के दौरान संबंधित एईआरओ के हस्ताक्षर भी गायब पाए गए। 
आपके बता दें कि वेबसाइट पर दर्ज आपत्तियों के आधार पर मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन ने सवाल उठाए हैं!
बीएलओ द्वारा सत्यापन और आवश्यक हस्ताक्षर न किए जाने के बावजूद, ये आपत्तियाँ चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज और प्रदर्शित हो रही हैं। इस खुलासे के बाद चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि बीएलओ और एईआरओ के सत्यापन के बिना ही आपत्तियां पोर्टल पर अपलोड हो रही हैं, तो यह गंभीर लापरवाही या गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
इस मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल किसी एक बूथ का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर प्रश्न है। कल भी चुनाव आयोग के समक्ष इस प्रकार की आपत्तियों को लेकर सवाल उठाए गए थे, और अब मंगलौर के बूथ संख्या 1 के घटनाक्रम ने इन आशंकाओं को और बल दे दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। मांग की गई है कि इस पूरे मामले की सच्चाई को पारदर्शी तरीके से जनता के सामने लाया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों व तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की साख बनी रहे।






