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​क्या फाइलों में सिमट गया ‘ड्रग्स फ्री उत्तराखंड’ का सपना? मंगलौर में नशे के खिलाफ क्यों ठंडी पड़ी पुलिस,नारकोटिक्स विभाग की कार्रवाई? नारकोटिक्स विभाग,मंगलौर पुलिस की ‘सुस्ती’ से नशे के सौदागरों के हौसले बुलंद; नारसन और लंढौरा में कार्रवाई ‘सिफर’!

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संवाददाता:अनिल सैनी/news1uttrakhand.in

मंगलौर (हरिद्वार): उत्तराखंड को ‘ड्रग्स फ्री’ बनाने का संकल्प क्या केवल फाइलों तक सीमित रह गया है? उत्तराखंड की धामी सरकार ने उत्तराखंड नशा मुक्ति अभियान चलाया हुआ हैं, लेकिन सवाल आज मंगलौर कोतवाली क्षेत्र के जागरूक नागरिकों के जहन में है। हाल के दिनों में कस्बे से लेकर देहात तक नशे के खिलाफ पुलिसिया वह नशे से संबंधित विभाग की कार्रवाई में आई भारी गिरावट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​नारसन और लंढौरा में कार्रवाई ‘सिफर’, होने के चलते नशा कारोबारियों के हौसले ‘बुलंद हैं!’

​ग्राउंड रिपोर्ट की मानें तो मंगलौर कोतवाली के अंतर्गत आने वाले नारसन और लंढौरा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की सक्रियता न के बराबर दिखाई दे रही है। एक समय था जब इन क्षेत्रों में नशे के सौदागरों पर नकेल कसी जाती थी, लेकिन पिछले काफी समय से यहां पुलिस की कार्रवाई ‘सिफर’ बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई की कमी के चलते नशे के कारोबारियों के हौसले फिर से बुलंद होने लगे हैं। अचानक नशे के विरूद्ध पुलिस के ​ढुलमुल रवैय्या के चलते जनता की चिंता बेहद गंभीर हैं!

​कस्बा क्षेत्र और ग्रामीण इलाकों में चर्चा है कि नशे के विरुद्ध अभियान अब केवल खानापूर्ति बनकर रह गया है। पुलिस के इस ढुलमुल रवैये का सीधा असर क्षेत्र के युवाओं पर पड़ रहा है। नाम ना बताने की शर्त पर मंगलौर नगर पालिका के एक सभासद का कहना है कि ​”नशे के खिलाफ कार्रवाई में जो मंगलौर पुलिस में जो सख्ती पहले दिखती थी, वह अब गायब है। आखिर क्या वजह है कि पुलिस की रडार से नशे के सौदागर बाहर हो गए हैं?

​उठते कुछ चुभते सवाल ​क्या मंगलौर कोतवाली क्षेत्र से नशे का काला बाजार वाकई खत्म हो चुका है?

​यदि नहीं, तो नारसन और लंढौरा जैसे इलाकों में सन्नाटा क्यों है? ​क्या पुलिस प्रशासन ने नशे के खिलाफ जारी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति से किनारा कर लिया है?

​युवाओं के भविष्य पर मंडराता खतरा मंगलौर और आसपास के देहात क्षेत्रों में स्मैक, चरस और प्रतिबंधित दवाओं का जाल पहले भी चर्चाओं में रहा है। ऐसे में कार्रवाई में कमी आना किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकता है। जनता अब उच्चाधिकारियों से मांग कर रही है कि मंगलौर पुलिस की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाए और नशे के खिलाफ एक बार फिर से ‘सर्जिल स्ट्राइक’ शुरू की जाए।

​ब्यूरो रिपोर्ट: News1Uttrakhand.in सच के साथ, आपकी आवाज़।

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