संवाददाता:शमसुल कुरेशी/news1uttrakhand.in
हल्द्वानी! कुमाऊं के सबसे बड़े राजकीय सुशीला तिवारी अस्पताल से संवेदनहीनता और घोर लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। अस्पताल कर्मियों ने एक मृतक के परिजनों को किसी दूसरे व्यक्ति का शव सौंप दिया। इस अमानवीय चूक का खुलासा तब हुआ जब परिजन शव को घर ले गए और अंतिम विदाई (अंतिम संस्कार) के लिए कफन हटाया। गलत शव देखकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई, जिसके बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ। 
मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल के मोर्चरी (शवगृह) से परिजनों को शव सुपुर्द किया गया था। परिजन बिना किसी संदेह के शव को अंतिम संस्कार के लिए अपने घर ले गए। घर पर जब अंतिम दर्शनों के लिए शव का चेहरा खोला गया, तो वह किसी और का निकला। इस बड़ी गड़बड़ी से मृतक के रोते-बिलखते परिजनों में कोहराम मच गया। आनन-फानन में परिजन शव को वापस लेकर अस्पताल पहुंचे और प्रबंधन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन बैकफुट पर है। सूत्रों के मुताबिक, प्रबंधन ने मामले की आंतरिक जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों को चिह्नित कर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की साख पर बड़ा बट्टा लगा दिया है। इस घटना ने अस्पताल के ‘डेड बॉडी मैनेजमेंट’ (शव प्रबंधन) और मोर्चरी स्टाफ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं!
घटना का वीडियो और खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। सोशल मीडिया पर लोग मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, डीएम नैनीताल और नैनीताल पुलिस को टैग करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।






