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विशेष रिपोर्ट: धर्मनगरी में ‘कट्टा कल्चर’ का खौफ, सोशल मीडिया पर रील और सड़कों पर कत्ल

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संवाददाता:डॉ.अरशद हुसैन/news1uttrakhand.in 

हरिद्वार। तीर्थनगरी हरिद्वार,जो अपनी शांति और आध्यात्मिकता के लिए जानी जाती है। बता दें कि इन दिनों अवैध हथियारों (तमंचों) की गूंज से थर्रा रही है। पिछले कुछ महीनों में क्षेत्र में अवैध असलहों के प्रदर्शन और उनके इस्तेमाल की वारदातों में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी हुई है। आलम यह है कि युवा अब न केवल अपराध के लिए, बल्कि सोशल मीडिया पर ‘रौब’ झाड़ने के लिए भी खुलेआम तमंचे लहरा रहे हैं। मानो सोशल मीडिया पर तो हथियारों का शोरूम बन गया है,कोई भी अब शोसल मीडिया पर रील बना कुछ व्यूज पाने के लिए तमंचे लहराता हुआ दिखाई दे जाता है। आख़िर इन लोगों पर यह अवैध तमंचे कहां से आ रहे है?इसको लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आपको बता दें कि हरिद्वार के उपनगरीय क्षेत्रों जैसे ज्वालापुर, बहादराबाद, लक्सर और रुड़की,मंगलौर में युवाओं के बीच ‘कट्टा कल्चर’ तेजी से पनप रहा है। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर हथियारों के साथ रील बनाना एक नया ट्रेंड बन गया है। रील में बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ तमंचा लहराते युवा न सिर्फ कानून को चुनौती दे रहे हैं, बल्कि अन्य किशोरों को भी इस अपराध की ओर आकर्षित कर रहे हैं। आखिर आम आदमी की पहुंच में अवैध असलहे कैसे पहुंच रहे है। सबसे बड़ा सवाल इन हथियारों की तस्करी और उपलब्धता पर खड़ा हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पड़ोसी राज्यों के सीमावर्ती इलाकों से अवैध तमंचों की तस्करी बेखौफ जारी है। सूत्रों के मुताबिक महज 3 से 5 हजार रुपये में अवैध तमंचा आसानी से उपलब्ध हो रहा है।छोटी-सी आपसी कहासुनी में भी अब बात लाठी-डंडों के बजाय सीधे गोलीबारी तक पहुंच रही है।

क्या पुलिस के पास नहीं है कोई ठोस प्लान?

लगातार बढ़ती वारदातों ने हरिद्वार पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि क्या पुलिस के पास इन अवैध हथियारों की कमर तोड़ने के लिए कोई ‘एक्शन प्लान’ है? हालांकि समय-समय पर पुलिस कुछ गिरफ्तारियां करती है, लेकिन तस्करी के मुख्य नेटवर्क और ‘सप्लायर’ तक पहुंचने में खाकी अब भी नाकाम दिख रही है।

स्थानीय निवासी का कहना है।अब तो मोहल्लों में लड़के बात-बात पर तमंचा निकाल लेते हैं। पुलिस का डर खत्म होता जा रहा है। अगर जल्द ही कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया गया, तो स्थिति हाथ से बाहर निकल जाएगी।”

प्रमुख मांगें और समाधान क्षेत्रीय जनता और बुद्धिजीवियों का मानना है कि पुलिस को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए।सोशल मीडिया मॉनिटरिंग हथियारों का प्रदर्शन करने वाले अकाउंट्स पर तत्काल साइबर सेल के जरिए कार्रवाई। बॉर्डर सीलिंग और चेकिंग के जरिए उत्तर प्रदेश से सटे रास्तों पर सघन तलाशी अभियान भी एक विकल्प हो सकता है। इस संबंध में खुफिया तंत्र की मजबूती से उन ‘ब्लैक स्पॉट्स’ की पहचान करना जहां इन असलहों की खरीद-फरोख्त होती है।

हरिद्वार में बढ़ता अपराध और अवैध असलहों की सुलभता पुलिस के इकबाल को चुनौती दे रही है। अब देखना यह होगा कि एसएसपी हरिद्वार इस ‘कट्टा कल्चर’ को रोकने के लिए क्या सख्त कदम उठाते हैं।

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